Abdul Bari bridge standing for 160 years

160 साल से खड़ा है ‘अब्दुल बारी पुल’, अभी भी गुजराती हैं कई ट्रेने

पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि कई पुल निर्माण के दौरान ही टूटने जाती है। लेकिन अपने ही देश में अब भी कई ऐसे पुल हैं, जिनसे हर दिन लंबी दूरी तक कई भारी-भरकम ट्रेनें तो गुजरती ही हैं, लोडेड अन्य वाहन भी दिनभर गुजरते रहते हैं।

इसके बावजूद ये पुल 100 नहीं बल्कि 160 साल से यूं ही टिका हुआ है, और मौन रहकर भी अपने निर्माण कौशल की कहानी राहगीरों को सुनाते रहते हैं। ऐसा ही एक अब्दुल बारी पुल भोजपुर जिले के कोईलवर में सोन नदी पर है, जिसे अंग्रेजों के द्वोरा बनाया गया है।

हालांकि अब वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए इसके समानान्तर दूसरा सड़क पुल बनाकर इस पुल का लोड कम कर दिया गया है बावजूद इस पुल की अहमियत अब भी कम नहीं हुई है।

पुल का चबूतरा वर्ष 2016 में टूट गया था

कहा जाता है कि वर्ष 2016 में सोन नदी में आए बाढ़ के दौरान कटाव बढ़ने से इस अब्दुल बारी पुल के पिलर में जमीन पर बना चबूतरा टूट गया था। जब नदी में पानी कम हो गया तो लोगों ने इसे देखा। तब से इस पुल से होकर गुजरने वाले लोग कयास लगाने लगे कि पुल का पिलर कभी भी धंस सकता है।

Abdul Bari bridge was built in 1862
अब्दुल बारी पुल को 1862 में बनाया गया था

लेकिन इन 8 वर्षों में भी इस पिलर अब भी वैसे ही खड़ा है। टूटे चबूतरे से पुल के पिलर को कोई नुकसान है या नहीं है, यह तो टेक्निकल एक्सपर्ट ही बता पाएंगे, लेकिन आमजन टूटे चबूतरे को देख इसकी मरममत कराने के लिए विभिन्न माध्यमों से रेल विभाग को कहते रहते हैं।

हावड़ा-दिल्ली रूट का है महत्वपूर्ण पुल

सोन नदी पर बना यह पुल हावड़ा-दिल्ली रूट का महत्वपूर्ण पुल है। इसे ब्रिटिश राज में पटना और आरा के बीच सोन नदी पर 1862 में बनाया गया था। 160 साल से यह पुल देश की सेवा में यूं ही अपने स्थान पर खड़ा है।नई दिल्ली से कोलकाता को जाने वाली कई सुपर फास्ट और राजधानी एक्सप्रेस इस पुल से गुजरती हैं।

जानकार कहते हैं कि 1851 में सोन नदी पर ईस्ट इंडिया रेलवे कंपनी ने इस रेल पुल को बनाने के लिए सर्वे कराया था। 1856 में निर्माण का काम शुरू हो गया और 5 साल बाद 1862 में पुल बनकर तैयार हो गया। उसी साल यह रेल पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया था।

फिल्म गांधी में दिखाई गई थी झलक

सोन नदी पर 1,440 मीटर लंबे इस पुल का उद्घाटन तत्कालीन वायसराय लार्ड एल्गिन ने किया था। इस पुल का डिजाइन जेम्स मिडोज रेनडेल और सर मैथ्यु डिग्बी वाइट ने किया था। रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी में इस पुल की छोटी सी झलक देखी जा सकती है।

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