Dairy farm Business: गाय-भैंस के बिना भी शुरू कर सकते है डेयरी का व्यपार, सरकार दे रही है लोन

Araria News
गाय-भैंस के बिना भी शुरू कर सकते है डेयरी का व्यपार, सरकार दे रही है लोन

अगर आप बिज़नेस करना चाहते है और ज्यादा मुनाफा पाना चाहते है तो डायरी बिज़नेस शुरू कर सकते है । हमारे देश में कृषि का योगदान 28% से अधिक है यानी छह लाख करोड़ से भी अधिक का कारोबार है ।

डेयरी का कारोबार करने चाहते है तो आप इसमें आप डेयरी प्रोडक्ट का बिजनेस शुरू कर सकते हैं या फिर गाय-भैंस पालकर उसकी दूध सप्लाई से अच्छा पैसा कमा सकते हैं।  ऐसे में अगर आप गाय-भैंस नहीं पालना चाहते हैं और कोई डेयरी बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो भी आपके लिए ऑप्शन है। इस स्थिति में आप दूध कलेक्शन सेंटर खोल सकते हैं और दूध कंपनियों को पैसे भेज सकते हैं।

 

कैसे काम करती है दूध कलेक्शन सेन्टर
इसके लिए आपको ज्यादा पैसे निवेश करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए आपको पहले किसी दूध कंपनी से कॉन्ट्रेक्ट करना होता है और फिर उन्हें घर-घर से दूध इकट्ठा करके देना होता है। इस काम सहकारी संघ के द्वारा किया जाता है, जिसमें पहले कुछ लोग मिलकर एक समिति बनाते हैं। फिर कुछ गांवों पर एक कलेक्शन सेंटर मिलता है और उन्हें डेयरी की कंपनी की ओर से ही इसके लिए पैसा दिया जाता है।

क्या काम करती है
हर दूध कंपनी अलग अलग गांवों से पहले पशुपालकों से दूध इकट्ठा करती है। जगह-जगह से दूध इकट्ठा होने के बाद ये कंपनियों के प्लांट तक पहुंचता है और वहां इस पर काम किया जाता है। यह काम पूरे प्रोसेस से होता है, जिसमें पहले गांव के स्तर पर दूध इक्ट्ठा किया जाता है और फिर इसे एक जगह से दूसरे शहर या प्लांट तक भेजा जाता है. ऐसे में आप दूध कलेक्शन खोल सकते हैं।

कलेक्शन सेंटर का काम होता है कि वह हर गांव से दूध इकट्ठा करता हैं और फिर इसे प्लांट तक भेजता  हैं। कई कलेक्शन सेंटर खुद पशुपालकों से दूध कलेक्ट करते हैं, जबकि कई जगह लोग खुद कलेक्शन सेंटर पर दूध देने आते हैं। ऐसे में आप कलेक्शन सेंटर का काम होता है कि वो दूध के फैट को जांचकर इससे अलग अलग कंटेनर में स्टोर करता है और फिर इसे दूध कंपनी को भेजता है।

डेयरी व्यापार के लिए सरकार देती है लोन
केंद्र सरकार की डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) के अलावा राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर इसके विकास के कार्यक्रम चला रही हैं। जिनमें 25 से लेकर 90 फीसदी तक की सब्सिडी है। केंद्र सरकार नाबार्ड के जरिए पशुपालन के लिए मदद देती है। डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत एक पशु पर 17,750 रुपये की सब्सिडी मिलती है. जबकि अनुसूचित जाति और जन जाति के लिए यह रकम 23,300 रुपये प्रति पशु हो जाती है। मिल्क प्रोडक्ट बनाने की मशीन के लिए भी पैसा मिलता है। हालांकि, इसके जरिए आप गाय-भैंस खरीदकर अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं।

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