बिहार के इस गाँव में आजादी के बाद पहली बार किसी युवक को मिली सरकारी नौकरी

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वायरल: बिहार के इस गाँव में आजादी के बाद पहली बार किसी युवक को मिली सरकारी नौकरी

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड के सोहागपुर गांव में आजादी के 75 साल बाद पहली बार किसी युवक को सरकारी नौकरी मिली है (First time government job in Muzaffarpur Sohagpur). इसे लेकर ग्रामीणों में काफी खुशी है। पूरे गांव में आज तक किसी काे सरकारी नौकरी नहीं मिली थी।

गांव के युवक राकेश कुमार ने इस मिथक को तोड़ कर अब सरकारी शिक्षक बन गए हैं। राकेश की नियुक्ति जिले के तुर्की के प्राथमिक विद्यालय बरकुरवा में हुई है। आठ सितंबर काे नियुक्ति पत्र मिला है। वे अब बच्चों को शिक्षा देंगे।

साेहागपुर गांव में पहली बार लगी सरकारी नौकरी

यह गांव लगभग दो हजार लोगों की आबादी वाला है। आज तक किसी को सरकारी सेवक बनने में सफलता नहीं मिली थी। गांव के राम लाल चौधरी के पुत्र राकेश कुमार ने अपनी सच्ची लगन और मेहनत के बदौलत मुकाम हासिल कर दिखाया।

In Sohagpur village, for the first time after 75 years of independence, a youth has got a government job.
सोहागपुर गांव में आजादी के 75 साल बाद पहली बार किसी युवक को सरकारी नौकरी मिली है
Credits: News18

गांव में प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद दरभंगा यूनिवर्सिटी से एमकॉम किया। उसके बाद राजस्थान से B.Ed की परीक्षा पास की। जिसके बाद बिहार में शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई, जिसमें उसे सफलता हासिल की।

सच्ची लगन और मेहनत से पढ़ाई करने पर मिलती है सफलता

राकेश ने बताया कि काफी संघर्ष करना पड़ा। पिता की मौत के बाद ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की। उसके बाद परीक्षा की तैयारी करनी शुरू की। राकेश की सफलता की बात सुनकर स्थानीय लोग भी काफी खुश हैं।

गांव वालों का कहना है कि गांव का यह पहला लड़का है जो अपनी मेहनत और लगन की बदौलत आजादी के 75 साल बाद नौकरी हासिल की है। अपने गांव का नाम रोशन किया है। गांव के युवा और बच्चों को राकेश से सीख लेने की जरूरत है। सच्ची लगन और मेहनत से पढ़ाई करने पर सफलता मिलती है।

ट्यूशन पढ़ाकर पढ़ाई और तैयारी की

“हमारे गांव में लगभग 2000 लोगों की आबादी है लेकिन आज तक किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिली। मैंने गांव में ही पढ़ाई की। बाद में दरभंगा यूनिवर्सिटी से एम. कॉम किया और उसके बाद राजस्थान से बीएड की परीक्षा पास की। जिसके बाद बिहार में शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई और उसमें मैं सफल रहा। पिताजी की मृत्यु के बाद ट्यूशन पढ़ाकर पढ़ाई और तैयारी की।”- राकेश कुमार, शिक्षक

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